#रफ़ू




रोहित ऑफिस निकल गया था नैना बैठे -बैठे बोर हो रही थी... फोन उठाया तो सोच में पड़ गई किसको कॉल करूँ?? फोन को वापस डायनिंग टेबल पर रखा और उसी के पास फुल लेन्थ की कांच की खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई। लिनेन के सफ़ेद पर्दों से गार्डन की जो धुंधली सी झलक मिलती थी उससे उसे बहुत खुशी मिलती थी। "अभी तो रोहित गया है शाम से पहले तो आएगा नहीं ... नया शहर है जाऊँ भी तो कहा... कैसे टाइम -पास होगा..." इन छोटी छोटी बच्चों जैसी मन की उथल-पुथल से वो अशांत हो ही रही थी तब तक पीछे से अवाज़ आई " मेमसाहब, आपके लिए कॉफी बना दूँ,...?? राजू भैया जो कि बहुत पुराने खानसामे थे, भला उनकी हाँथ की कॉफी टैस्ट करने से नैना पीछे कैसे हटती..उसने तुरंत कहा "जी भैया ,बना दीजिए..लेकिन अपनी भी बना लीजियेगा.." राजू भैया मुस्कुरा कर तुरंत किचन की ओर चल दिए  और नैना खिड़की के अपने ख़ज़ाने को आँखों से अलविदा कह कर सोफ़े की तरफ मुड़ी। 
अचानक उसका दुपट्टा खिड़की की चौखट से निकली एक कील में अटक गया। नैना के अंदर एक छोटी चीख सी निकली...जो उसने अंदर ही दबा ली.. रोहित का यह फेवरिट दुपट्टा था! दुपट्टे को निकालने की कोशिश ने उसपर एक खोंच(छोटा छेद) लगा दिया था... नैना की आंखों में सबकुछ एक रील की तरह चल गया...। वो दुपट्टे का पापा की स्कूटर में फ़सना, कभी अपनी स्कूटी की डिक्की में, कभी रोहित से डेट करने के दिनों में उसकी बाइक में, शादी के बाद विदाई में और अभी हाल ही में ट्रांसफर के समय पुराने घर में। 
माँ अक्सर उसे समझाती "सम्भाल कर पहना करो इसे..तुम बहुत लापरवाही करती हो कहीं खोंच लग गया तो "रफ़ू" कराना पड़ेगा!" माँ की वो डांट आज उसे फिर से याद आ गई... लेकिन उस छोटी सी डांट में माँ ने मुश्किल से निकलने का हल भी बता दिया था "रफ़ू", ये नैना को अब समझ आया। 
वो सोचने लगी कि हम जिंदगी को खुद ही इतना कॉम्पलेक्स क्यूँ बना देते हैं ?क्यूँ हम अपनी परेशानियों, अपनी शिकायतों, अपनी यादों, अपनी ग़लतियों को "रफ़ू" कर ,नए सिरे से आगे नहीं बढ़ते हैं? क्यूँ हम अपनों से सिर्फ एक धागा इधर उधर होने के कारण दूर हो जाते हैं? सोचते-सोचते आँसू की एक बूंद उसके चेहरे को भिगोते हुए उसके दुपट्टे पर जा गिरी और धागों में खो गई... वो दुपट्टे के छेद वाले कोने को पकड़े -पकड़े सोफ़े पर बैठ गई। राजू भैया ट्रे में कॉफी लेकर आए और देखते ही बोले "अरे, मेमसाहब ये क्या हुआ? खोंच लग गया शायद..कोई बात नहीं हमें दे दीजिए हम इसे रफ़ू करवा लाएंगे " 
नैना वो जाना पहचाना सा शब्द सुनकर  स्तब्ध रह गई! "रफ़ू" 

- श्वेता 

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