#टाइम्स स्क्वेयर
जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था...टाइम्स स्क्वेयर की रोशनी वैसे-वैसे बढ़ रही थी मानो जैसे किसी के जाने के बाद के खालीपन को भरने का वो उजाला जो हमारे पास तो है पर फिर भी हम उसे अनदेखा कर देते हैं। मीरा भी इस नए वातावरण में कुछ अनजाने लोगों के बीच उसी खालीपन को दूर करने के लिए टाइम्स स्क्वेयर की उन जगमगाती सड़कों पर टहलने निकल आयी थी। आखिर करती भी तो क्या मनीष ने अभी- अभी भारतीय महावाणिज्य दूतावास में कॉन्सल जनरल की पोस्ट पर जॉइन किया था... मनीष के पास समय नहीं था और मीरा के पास समय ही समय..। टाइम्स स्क्वेयर की शाम के बारे में मीरा ने बहुत सुना था लेकिन पता नहीं ये अनजानी जगह उसे कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी। वॉक करते-करते उसे सड़क पर पड़ती बड़ी स्क्रीनस की रोशनी कुछ पुरानी धुंधली यादों में खींच रही थीं... हाँ ,यही ठंड का समय वहीं चहल -पहल के बीच वाली अनोखी शांति जिसमें हम खुल के जी लेते हैं..साँस ले पाते हैँ..!! दस साल पहले का यही दिन कनाट प्लेस , दिल्ली..कुछ कुछ ऐसा ही...!! स्टारबक्स की कॉफी शॉप देखकर मीरा के सामने तो जैसे पूरा का पूरा एल्बम खुल गया हो। आज ही क...
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