Skip to main content

Posts

Featured

#टेलीफोन

बात उन दिनों की है जब हम "कॉल" नहीं "डायल" करते थे। ग्राहमबेल जी के इस अविष्कार को हमारा कोटि-कोटि प्रणाम, जिन्होंने हमें भाषा की परिभाषा पुनर्परिभाषित करने का अवसर दिया। हिन्दी व्याकरण की किताब में पहले पाठ में अंगिनत बार पढ़ा है कि भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को व्यक्त कर सकता है ... भाषा को वैचारिक आदान-प्रदान का माध्यम कहा जा सकता है। लेकिन "टेलीफोन सेवा"...अगर शुद्ध हिंदी में कहा जाये तो "दूरभाष यंत्र " ने तो हमारे मन के विचारों को पहुचाने की काया पलट ही कर दी..!! अंग्रेजों का तो पता नहीं लेकिन भारतीयों के लिए तो ये किसी जादुई पिटारे से कम नहीं था..!! हाँ, "पोस्ट-मैन" समेत "कबूतरों" को जरूर अनइम्पलोइमेनन्ट का झटका लगा !! "टेलीफोन" हर किसी की ज़रूरत बन गया। उस समय टेलीफोन का घर में होना एक बहुत गर्व की बात होती थी.. याद है??1980 में बेनोटैक कंपनी का वो लाल रंग का लैंड लाइन कई घरों की शोभा बढ़ाता था.!! हमारे पुराने फोटो एल्बम इस बात के गवाह हैं कि इस लाल यंत्र के इर्द-गिर्द घूम कर हमनें जाने क...

Latest Posts

#टाइम्स स्क्वेयर

#स्कूटर

#चाय

#नया जूता

#रफ़ू

Transfer, Turmoil and Taj

कण-कण में तू

Phir bhi Dil hai Hindustani

आज कश्मीर फिर से लाल हो गया...

वो 1990 वाली सर्दी याद आ रही है...