कण-कण में तू
मस्तक में तू, दस्तक में तू,
जो चल रहीं है साँसें भी तू,
मेरा रक्त तू ,सर्वस्व तू,
मेरा शादर्श तू,आदर्श तू,
तन तन में तू, कण-कण में तू..
मेरा सत्य तू ,असत्य तू,
जो दिख रहा दर्पण में तू,
तू मेरा सुख ,मेरे दुख में तू
मेरा अभिमान तू, स्वाभिमान तू,
मन मन में तू, कण-कण में तू....
मेरा अक्स तू, निष्पक्ष तू,
जो बीत रहा समय है तू,
तू ही है अंत, अनंत तू,
मेरा काल तू, मेरा कल भी तू,
अनाथ मैं, मेरा नाथ तू,
क्षण क्षण में तू, कण-कण में तू...
मेरी भक्ति तू, अभिव्यक्ति तू,
जो हो रहा श्रृंगार तू,
चंदन भी तू, वंदन भी तू,
रूद्राक्ष तू, शिवाक्ष तू ,
घुँघरू में तू, डमरू में तू,
डम डम में तू , कण -कण में तू....
मेरा प्राण तू, प्रमाण तू,
जो निर्मित हुआ ब्रह्मांड तू,
धड़कन भी तू, तड़पन भी तू,
विश्वास तू , पश्चाताप तू,
जन जन में तू, कण-कण में तू...
जीवन में तू, मरण में तू,
चिता से उड़ती भस्म तू,
गंगा भी तू, यमुना भी तू,
कंकड़ भी तू, शंकर भी तू,
फण फण में तू, कण कण में तू,...
दर्शन भी तू, वर्णन भी तू,
मोक्ष तू, विमोक्ष तू,
मंथन भी तू, अमृत भी तू,
जो कंठ में रुका वो विष भी तू,
धन धन में तू, रण रण में तू,
रवण भी तू श्रावण भी तू,...
मुझमें भी तू, और मैं भी तू,
प्रण प्रण में तू, कण कण में तू......
- श्वेता



Beautifully expressed....👍
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