#टाइम्स स्क्वेयर



जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था...टाइम्स स्क्वेयर की रोशनी वैसे-वैसे बढ़ रही थी मानो जैसे किसी के जाने के बाद के खालीपन को भरने का वो उजाला जो हमारे पास तो है पर फिर भी हम उसे अनदेखा कर देते हैं। मीरा भी इस नए वातावरण में कुछ अनजाने लोगों के बीच उसी खालीपन को दूर करने के लिए टाइम्स स्क्वेयर की उन जगमगाती सड़कों पर टहलने निकल आयी थी। आखिर  करती भी तो क्या मनीष ने अभी- अभी भारतीय महावाणिज्य दूतावास में कॉन्सल जनरल की पोस्ट पर जॉइन किया था... मनीष के पास समय नहीं था और मीरा के पास समय ही समय..। 

टाइम्स स्क्वेयर की शाम के बारे में मीरा ने बहुत सुना था लेकिन पता नहीं ये अनजानी जगह उसे कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी। वॉक करते-करते उसे सड़क पर पड़ती बड़ी स्क्रीनस  की रोशनी कुछ पुरानी धुंधली यादों में खींच रही थीं... हाँ ,यही ठंड का समय वहीं चहल -पहल के बीच वाली अनोखी शांति जिसमें हम खुल के जी लेते हैं..साँस ले पाते हैँ..!! दस साल पहले का यही दिन कनाट प्लेस , दिल्ली..कुछ कुछ ऐसा ही...!! स्टारबक्स की कॉफी शॉप देखकर मीरा के सामने तो जैसे पूरा का पूरा एल्बम खुल गया हो। आज ही के दिन वो समर से आखिरी बार मिली थी।  

दोनों ही तेइस- चौबीस की उम्र में थे... प्यार इतना गहरा की जिसका कोई माप ना हो...! दोनों जितना एक दूसरे को समझते थे उतना ही एक दूसरे की भावनाओं का आदर भी करते थे..। समर इंजीनियरिंग कर रहा था और मीरा कैट की तयारी....समर के प्लेसमेंट की प्रार्थना मीरा की जुबान पर हमेशा इन्तेज़ार करती..की कब कोई मंदिर दिखे, या तारा टूटे और वह अपना दिल खोलकर रख दे। आज समर की नौकरी लग गई थी बहुत अच्छा पैकेज था...उसकी खुशी का ठिकाना ना था...। जहां मीरा घंटों उसे कॉल लगाती रहती और वह कभी कॉलेज के मैच, कभी दोस्तों के रूम, कभी लेक्चर में रहता ..और उसके कॉल बैक का इन्तेज़ार करती मीरा सो जाया करती। आज उसी समर ने सबसे पहले अपनी मीरा को कॉल लगाया... तीन चार बार पूरी रिंग जाने के बाद मीरा का एक मैसेज आया.."मीट मी ईन स्टारबक्स,CP" समर ने भी सोचा आज  मिलकर सरप्राइज के तौर पर मीरा को यह ख़बर सुनाएगा...। 

मीरा फिरोज़ी रंग के कॉटन सूट में सफेद कनाट प्लेस की दीवारों के बीच ऐसे प्रतीत हो रही थी मानो जैसे सफ़ेद बादलों के बीच नीला आसमान झाँक रहा हो.. ।हल्की ठंड में ऊपर से एक पशमीना शॉल डालकर मीरा ढलते हुए सूरज और चढ़ती हुई कनाट प्लेस की रौनक की साक्षी बनी समर का इन्तेज़ार कर रही थी। समर की नज़रों ने दूर से ही मीरा की वो ख़ूबसूरत तस्वीर चुरा लि...शायद उसे पता नहीं था कि ये उसकी और मीरा की आखिरी मुलाकात थी। मीरा ने समर को देखते ही उसे कसकर गले लगा लिया... समर ने बिना रुके मीरा के कानों में कहा "यार, आई डीड इट..!!" आई गौट द जॉब मीरा"..ये सुनते ही मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे जैसे वो भी अपना रास्ता ढूंढ रहें हो..।मीरा ने आस भरी निगाहों से समर से पूछा.."दैट मीन्स, नाउ वी कैन डिसाइड वोट टु डू नेक्स्ट..?" समर ने छूटते ही कहा, " वाॅट डू यू मीन??" मीरा ने बहते हुए आंसुओं के साथ अपनी ख़ुशनुमा हसीं लिए उत्तर दिया, "समर, डिसाइड अबाउट  अस..!! अब हमें क्या करना है.. मेरे मम्मी डैडी से बात करने आओगे ना..??" समर हड़बड़ाया सा उसके कंधों को अपने हाथों से दूर करता हुआ बोला, " क्या?मीरा मेरे लिए ये सब बहुत जल्दी है..मैंने तो अभी इसके बारे में सोचा तक नहीं..आई मीन.. आई नीड टाइम..!!" मीरा की आंखों में आंसुओं की जगह धीरे- धीरे अब क्रोध ने ले ली थी... वही समर जो कुछ मिनटों पहले तक उसकी रूह का हिस्सा हुआ करता था वो अचानक उसे एक अजनबी सा लगने लगा था.. । मीरा को अब सारी पिछली बातें अब बहाने लगने लगे थे...उसका फोन ना उठाना..बिजी हूँ ..फ्रेंड्स के साथ हूँ, बहुत दिनों के बाद मिलना वो भी मीरा के कहने पर...। लेकिन समर का आज नौकरी मिलते ही सबसे पहले उसे कॉल करना..और भागते दौड़ते उसके एक बार बुलाने पर आना..मीरा ने उसकी इस पहल को उन प्रश्नों के पीछे कहीं छुपा दिया था। कभी-कभी प्यार चाहे कितना भी गहरा हो पर उसकी गहराई झाँकने और उसी गहराई में साथ कूदने की बात ही कुछ और है। कुछ इसमें कूदने की हिम्मत तो रखते हैं लेकिन उन्हें रोकती हैं ये सांसारिक बेड़ियाँ.. और कुछ बस आँखें बंद कर कूद जाते हैं। 

समर ने मीरा को संभालते हुए कहा,"चलो लेट अस सिट डाउन.." मीरा ने हिम्मत जुटाई कॉफी टेबल पर बैठते ही उसने समर से कहा, "यु डोंट अंडरस्टेंड समर..मेरे पास टाइम नहीं है..यू नो ..मेरे पेरेंट्स मेरी शादी फाइनल कर रहें हैं.. मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है.." समर ने मीरा के हाथों को कसकर पकड़ा..एक पानी की बूँद दोनों के हाथों को छूते हुए टेबल पर गिरी.. आज समर भी अपने प्रेम को बहने से रोक नहीं पाया...।मीरा समझ गयी थी...!! वो उठी और बिना मुड़े कॉफी शॉप से बाहर निकलने लगी.. उसके मन में कई सवाल थे जिनके जवाब वो अब ढूंढना नहीं चाहती थी । मीरा स्टारबक्स के काँच के दरवाजे से बाहर निकल गई समर नम आँखों से उसे एक टक देखता रहा..।

अचानक स्टेनली बिल्डिंग (जिसके बेस पर स्टारबक्स स्थित है)उसके सामने 18,000 वर्ग फुट के विशाल LED डिस्प्ले की लाइट, जो पूरी इमारत के कोने पर लिपटी हुई थी..जो टाइम्स स्क्वेयर की सबसे चमकदार स्क्रीनों में से एक है.. मीरा के ऊपर रंग बिरंगी किरणें बिखरने लगी। 1585 ब्रॉडवे पर बना स्टारबक्स मीरा के लिए वही  कनाट प्लेस वाले पल ताज़ा कर रहे थे..वह मिलती जुलती उसी टेबल पर बैठी थी जहां उसने दस साल पहले अपना एक हिस्सा छोड़ दिया था। मीरा यादों के पर्दे को हटा कर अपने आप से सवाल कर रही थी ,"एक वो दौर था जब मेरे पास समय नहीं था..और समर के हिसाब से उसके पास बहुत टाइम था... और एक आज का दिन है जब मेरे पास समय ही समय है लेकिन मनीष के पास नहीं..." वक़्त कितनी तेजी से करवट लेता है..लेकिन हर करवट हमें कुछ सीखा जाती है...।" 

स्टारबक्स  के बिल्कुल सामने जो विशाल स्क्रीन है उसके बिल्कुल बीच में एक खास स्टेज बना हुआ है। जब कोई लाइव परफॉर्मेंस होती है, तो यह LED स्क्रीन बीच से दो हिस्सों में खुल जाती है और अंदर से एक शानदार स्टेज बाहर आ जाता है। मीरा ने अपनी कॉफी उठाई ही थी की अचानक से मुगल-ए-आजम के मशहूर गाने "जब प्यार किया तो डरना क्या" पर अनारकली सूट पहने कथक डांसर्स का लाइव फ्लैश मॉब वहाँ प्रकट हो गया और गानों की मशहूर लाइने पूरे वातावरण में गूंजने लगी "पर्दा नहीं जब कोई खुदा से बंदों से पर्दा करना क्या.. जब प्यार किया तो डरना क्या..!!" मीरा मुस्कुराइए और सोच लिया की अपनी इस छोटी सी कहानी को डर डर कर याद नहीं करेगी..दर्द तो होगा पर हर बार उसे ये यादें याद दिलाएगी की कुछ कहानियों का अंत नहीं होता वो खुदा ने इतने प्यार से लिखी होती हैं की वह जीवन भर आपके साथ जुड़ी होती हैं..क्यूंकि वो सिर्फ आपकी होती हैं..उन्हें कोई छीन नहीं सकता ना ही कोई मिटा सकता है...। भले ही वो समर से बहुत नाराज थी लेकिन आज उसे विश्वास था की समर के लिए भी ये कहानी हमेशा जिंदा रहेगी....। पीछे से उसके बालों पर हांथ फेरता हुआ कोई उसके सामने आकर बैठ गया..मीरा चौक गई!! मनीष हाँथों में गुलाबों का गुलदस्ता लिए गाने लगा, "प्यार किया तो डरना क्या..." मीरा और मनीष दोनों हसी के ठहाकों में एक दूसरे के साथ झूम उठे..।

-श्वेता 

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